शुक्रवार, अप्रैल 29, 2011

खाई है सूखी रोटी ,

सूखी रोटी भी नसीब नहीं, कहते हैं की कहूँ, खीर खाई है 
मैं रचना गूढ़ लिखूं ,गम्भीर लिखूं ,
मैं दिल की उभरी पीर लिखूं ,
खाई है ,सूखी रोटी ,
तो  फिर  कैसे पूरी-खीर लिखूं ,

मैं घावों की गहरी टीस लिखूं ,
डॉक्टर की महँगी फीस लिखूं ,
माँ-बाप की बिमारी लिखूं ,
तंग जेबों की लाचारी लिखूं ,
है जो कातिल मैं जान रहा ,
फिर कैसे उसे फ़कीर लिखूं ,
खाई है सूखी रोटी ,
तो फिर कैसे पूरी खीर लिखूं  
मैं रचना गूढ़ लिखूं गंभीर लिखूं ,
मैं दिल की उभरी पीर लिखूं ,

हैं हित टंगे हांसिये,पर सब के ,
जो दीन, दमित ,निधन तबके ,
मैं उनकी रोटी की तरसन लिख दूं ,
चीत्कार -रुदन- गर्जन- लिख दू
मैं अंधी और बहरी सरकार का हाल लिखूं ,
मैं अपने दिल का मलाल लिखूं ,
अब मन कहता है ,चीख -चीख ,
खुद के हाथों से खुद की तकदीर लिखूं ,
मैं रचना गूढ़ लिखूं ,गंभीर लिखूं ,
मैं दिल के उभरी पीर लिखूं ,
खाई है सूखी रोटी ,
तो फिर कैसे पूरी खीर लिखूं  ,

तुम्हारा --अनंत 

16 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत बढ़िया ...जब मन में पीर हो तो कैसे लिखी जाए पूरी खीर ...




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वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

निशांत ने कहा…

बहुत अच्छी रचना है...
और एक बुलंद आवाज़ दे रही है ..

anurag anant ने कहा…

thax sangeeta jee

sandip!!singh ने कहा…

ati uttam anantji prayas jaari rahe.

sandip!!singh ने कहा…

ati uttam anantji prayas jaari rahe!

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

शुभागमन...!
कामना है कि आप ब्लागलेखन के इस क्षेत्र में अधिकतम उंचाईयां हासिल कर सकें । अपने इस प्रयास में सफलता के लिये आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या उसी अनुपात में बढ सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको 'नजरिया' ब्लाग की लिंक नीचे दे रहा हूँ, किसी भी नये हिन्दीभाषी ब्लागर्स के लिये इस ब्लाग पर आपको जितनी अधिक व प्रमाणिक जानकारी इसके अब तक के लेखों में एक ही स्थान पर मिल सकती है उतनी अन्यत्र शायद नहीं । प्रमाण के लिये आप नीचे की लिंक पर मौजूद इस ब्लाग के दि. 18-2-2011 को प्रकाशित आलेख "नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" का माउस क्लिक द्वारा चटका लगाकर अवलोकन अवश्य करें, इसपर अपनी टिप्पणीरुपी राय भी दें और आगे भी स्वयं के ब्लाग के लिये उपयोगी अन्य जानकारियों के लिये इसे फालो भी करें । आपको निश्चय ही अच्छे परिणाम मिलेंगे । पुनः शुभकामनाओं सहित...

नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव.

बेहतर स्वास्थ्य की संजीवनी- त्रिफला चूर्ण

APURVA ने कहा…

bahut badhiyan anant ji...aap kafi accha likh rahen hain...aasha hai aap kamyabi k is unmukt shikhar pare yun hi badhte rahenge hamarei subhkamnayen aap k sath hain...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 03- 05 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.blogspot.com/

वाणी गीत ने कहा…

खाई है सुखी रोटी तो कैसे पूड़ी - खीर लिखूं ...
लेखन तो वही सार्थक है जो अपने अनुभवों पर लिखा जाए ना की बंधी बंधाई लीक पर ...
जब हर तरफ लूटमार, चीख -पुकार मची हो तो कोमल गीत थोड़े मुश्किल हो जाते हैं ...

सार्थक रचना !

shikha varshney ने कहा…

गज़ब का फ्लो है रचना में. और सुन्दर भाव
बढ़िया प्रभावशाली रचना.

anurag anant ने कहा…

sangeet swaroop ji mai aapka abhaari hoon jo aapne meri rachna ko charcha manch me samil kiya

वन्दना ने कहा…

गज़ब का चिन्तन और लेखन है ……………दिल का दर्द उभर कर आया है……………शानदार लेखन्।

Markand Dave ने कहा…

अति सुंदर। बहुत बधाई।

मार्कण्ड दवे।
http://mktvfilms.blogspot.com

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत मर्मस्पर्शी और भावमयी प्रस्तुति..शुभकामनायें.

बेनामी ने कहा…

hirday choo gayi ye rachna sach me

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

bahut samvedna sheel rachna.