सोमवार, अक्तूबर 31, 2011

मैंने माँ को देखा है ,

माँ 
मैंने माँ को देखा है ,
तन और मन के बीच ,
बहती हुई किसी नदी की तरह ,
मन के किनारे पर निपट अकेले,
और तन के किनारे पर ,
किसी गाय की तरह बंधे हुए ,
मैंने माँ को देखा है ,
किसी मछली की तरह तड़पते हुए  बिना पानी के,
पर पानी को कभी नहीं देखा तड़पते  हुए बिना मछली के ,
मैंने माँ को देखा है ,
जाड़ा,गर्मी, बरसात ,
सतत खड़े किसी पेढ़  की तरह ,
मैंने माँ को देखा है ,
हल्दी,तेल, नमक, दूध, दही, मसाले में सनी हुई ,
किसी घर की गृहस्थी की तरह ,
मैंने माँ को देखा है ,
किसी खेत की तरह जुतते हुए,
किसी आकृति की तरह नपते हुए,
घडी  की तरह चलते हुए,
दिए की तरह जलते हुए ,
फूलों की तरह महकते हुए ,
रात की तरह जगते हुए ,
नींव में अंतिम ईंट की तरह दबते हुए ,
मैंने माँ को देखा है ,
पर..... माँ को नहीं देखा है,
कभी किसी चिड़िया  की तरह उड़ते हुए ,
खुद के लिए लड़ते हुए , 
बेफिक्री से हँसते हुए ,
अपने लिए जीते हुए, 
अपनी बात करते हुए ,
मैंने माँ को कभी नहीं देखा ,

मैंने बस माँ को माँ होते देखा है ,

तुम्हारा --अनंत 

16 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर ..हर पंक्ति मन को छू गयी .माँ बस माँ है ..

वन्दना ने कहा…

्बेहतरीन अभिव्यक्ति।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 3 - 11 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज ...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर ...संवेदनशील भाव लिए रचना .....

Dr.Nidhi Tandon ने कहा…

सच ही तो है...माँ बस माँ होती है ...

Prakash Jain ने कहा…

bahut bahut khoob...


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यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है आपने।

सादर

रचना दीक्षित ने कहा…

माँ को परिभाषित करना एक दुरूह सा काम लगता है पर हर किसी कि बात से सहमत भी होती रहती हूँ कि हाँ माँ ऐसी ही होती है

ASHA BISHT ने कहा…

behat sundar manobhav...

G.N.SHAW ने कहा…

ममत्व भरी -सुन्दर माँ ! बधाई

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

वाह! अत्यंत सुन्दर...
सादर बधाई...

shikha varshney ने कहा…

मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति.

dheerendra ने कहा…

संवेदन शील ममस्पर्शी सुंदर रचना अच्छी पोस्ट..
मेरे नए पोस्ट पर स्वागत है..

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri ने कहा…

बेहद भावपूर्ण माँ के मातृत्व को कृतज्ञता ज्ञापित करती अति कोमल भावांजलि....सादर !!!

बेनामी ने कहा…

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Pallavi ने कहा…

आज ब्लॉग बुलेटिन पर आपका ब्लॉग देखा पहली बार आना हुआ है बहुत अच्छा लगा "रश्मि प्रभा" जी के द्वारा आपसे मिलकर...बहुत ही संवेदनशील एवं सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति....