मंगलवार, नवंबर 23, 2010

मुझे तुमसे प्यार है, हाँ मुझे तुमसे प्यार है

बहुत दिनों से मैं चुप था ,खामोश था ,
मेरे भीतर का अरमान जमीदोश था,
आज हुआ क्या ये ,
ये कैसे हुआ उजाला ,
न जाने मैंने तुमसे कैसे कह डाला ,
मुझे तुमसे प्यार है, हाँ मुझे तुमसे प्यार है ,
यूँ देखता था तुम्हे,
बस तुम्हे देखता था ,
देख कर है हर बार ये सोचता था ,
कब आयेगा वो दिन जब कहूँगा दिल की बात,
लिख रहा हूँ जो ,मै ये आज की रात ,
मुझे तुमसे प्यार है,हाँ मुझे तुमसे प्यार है ,
तितलियों की पर की तरह,
नाजुक से दिल के ख्वाब थे ,
मै इक सियाह जहान था ,
तुम मेरे अफताब थे ,
तेरी इश्क की रौशनी में ,
मैंने दिल की दिवार पर लिख डाला ,
मुझे तुमसे प्यार है ,हाँ मुझे तुमसे प्यार है ,
''तुम्हारा --अनंत ''
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