मंगलवार, अप्रैल 12, 2011

साथी छूट गया

जब संगदिल के संग लगा ये दिल ,
इसे टूटना ही था , टूट गया ,
जो साथी कभी न साथ रहा ,
उसे छूटना ही था ,छूट गया ,

अब रह-रह कलम चलाता  हूँ ,
गम से ग़ज़ल बनाता हूँ ,
हर्फों के अश्क बहाता  हूँ ,
खुद से खुद को समझाता हूँ ,
अब प्यासा जीवन जीना है ,
तेरे  हाँथों का प्याला छूट गया ,

जब संगदिल के संग लगा ये दिल ,
इसे टूटना ही था टूट गया ,

जब कोई साँसों के जैसा हो जाये ,
धड़कन के संग घुल मिल जाये ,
उसे यूँ ही भूलाना मुश्किल है ,
जिस सपने में उसको पाया था ,
वो सपना शायद कच्चा था ,
उसे टूटना ही था ,टूट गया ,
जो साथी कभी न साथ रहा ,
उसे छूटना ही था , छूट गया ,

तुम्हारा -- अनंत 

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