शुक्रवार, अप्रैल 08, 2011

पुकार


आओ अन्ना के साथ चलें , भारत माँ पुकार रही हैं

फिर कुछ हलचल सी है शायाद,
 कोई सागर मंथन करता है ,
हिमगिरी का रक्त तिलक कर के,,
 कोई पूजन वंदन करता है ,
हील रही है संसद ये ,
लाल किला मुस्काता है ,
वृद्ध तिरंगा देखो कैसे ,
तरुणों सा लहराता है ,
राज घाट से तूफ़ान उठा है ,
जंतर -मंतर में घूम रहा है,
पहन चोला हजारे का ,
गाँधी बाबा झूम रहा है, 
भगत सिंह ल,क्ष्मी बाई,
आजाद बोस सब जागेगें,
गोरी चमड़ी के अंग्रेज गए ,
अब काली चमड़ी वाले भागेंगे ,
ये धर्म युद्ध की बारी है ,
हमें अर्जुन बन कर लड़ना है, 
है सम्मुख उतुंग शिखर तो क्या ,
हमे जय हिंद पुकार के चड़ना है ,
जब अन्ना की बूढी छाती में ,
देश भक्ति की धारा बह सकती है ,
तो फिर कैसे मेरे हिन्द की ,
 युवा पीढ़ी सो सकती है ,
अब हमे  कसम है भारत माँ की ,
हम उसके खातिर युद्ध करेंगे ,
जो पग आगे चल निकले है ,
अब पीछे नहीं  धरेंगे ,
तुम्हारा --अनंत

अन्ना हजारे के इस प्रयास  में, मैं और मेरी रचनात्मकता दोनों साथ हैं ,और एक सुन्दर और स्वस्थ भारत बनाने के लिए कटिबद्ध हैं ,आप इस कविता पर टिप्पड़ी  कर के अपनी राय  से अवगत कराएँ ,साथ ही साथ इसे कम से कम १० लोगों को मेल करें तथा फसबूक से शेयर भी करे ...................
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 --अनंत  
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