शनिवार, नवंबर 20, 2010

बंधन

तोड़े नहीं टूटेगा ,दिल का है जो ये बंधन ,
इस बंधन से बंधा हुआ है ,तेरा मेरा जीवन ,
एक डोर  है हाँथ मेरे ,
एक डोर है हाँथ  तेरे ,
मैं तुझको खींच रहा  हूँ ,
तू रह -रह मुझको खींचे ,
कोई रोक नहीं सकता है ,
अब तेरा -मेरा मिलन ,
तोड़े नहीं टूटेगा ,दिल का है जो ये बंधन ,
इस बंधन से बंधा हुआ है ,तेरा मेरा जीवन ,
टूटेगी सांस मगर ,
रिस्ता नहीं टूटेगा ,
छूटेगा जग सारा ,
पर तेरा हाँथ न छूटेगा ,
प्रीत की डोर से है ,
बंधा, तेरा मेरा मन ,
तोड़े नहीं टूटेगा ,दिल का है जो ये बंधन ,
इस बंधन से बंधा हुआ है तेरा मेरा जीवन ,
हम अलग हो कर भी ,
अलग नहीं है रे ,
रूह है साथ हमारी ,
है साथ हमारी साँसे ,
मैं प्रेम बिम्ब हूँ प्रिये ,
और तुम हो प्रेम दर्पण ,
तोड़े नहीं टूटेगा ,दिल का है जो ये बंधन ,
इस बंधन से बंधा हुआ है तेरा मेरा जीवन ,
बरसेगी ख़ुशी जहाँ ,
मेघ प्रेम का बरसेगा ,
तृप्ति होगी वहां ,
न मन तेरा -मेरा तरसेगा,
उस स्वप्न महल की तुम छत हो जाना ,
और मैं हो जाऊँगा आँगन ,
तोड़े नहीं टूटेगा दिल का है जो ये बंधन ,
इस बंधन से बंधा हुआ है तेरा मेरा जीवन
''तुम्हारा ---अनंत ''
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