बुधवार, नवंबर 24, 2010

मुझे छुओ मत जल जाओगे

मुझे छुओ मत जल जाओगे ,
तपन है कितनी ,दर्द है कितना ,
जलता है यहाँ तिनका -तिनका,
तुम मेरे पास न आओ प्यारे ,शोक अग्नि में गल जाओगे ,
मुझे छुओ मत जल जाओगे ,
कोई मुझे जला कर चला गया है ,
मुझे बड़े प्रेम से छला गया है ,
सब ढल जाते हैं इस आसमान में ,तुम भी इक दिन ढल जाओगे ,
मुझे छुओ मत जल जाओगे ,
मत कहो कि मैं कहूँ कहानी,
आँखों से फिर झरेगा पानी ,
पत्थर पिघला गाथा सुन कर ,तुम भी व्यर्थ पिघल जाओगे ,
मुझे छुओ मत जल जाओगे ,
''तुम्हारा -अनंत ''
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