मंगलवार, नवंबर 16, 2010

एहसास

मैं तो बस एक एहसास हूँ,
तितली कि पंखों की रंगत ,
चिड़ियों की कोमल सी हरकत ,
नदी ,पहाड़ी, जंगल ,झाड़ी जमीन और आकाश हूँ ,
मैं तो बस एक एहसास हूँ ,
मंदिर, मस्जिद,मुझे न देखो ,
देख सको तो खुद में देखो ,
क्यों दर-दर भटक रहे हो प्यारे ,मैं कब से तुम्हारे ही पास हूँ ,
मैं तो बस एक एहसास हूं,
लोग मुझे सागर कहते है ,
अल्लहा,ईसू नानक ,नटनागर कहते है ,
पर सच तो ये है मैं ,गरीबों की भूख और प्यास हूँ ,
मैं तो बस रक एहसास हूँ ,
''तुम्हारा --अनंत ''
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