सोमवार, जुलाई 03, 2017

तेरी याद आती है.....!!

एक टुकड़ा याद अटकी है साँसों में
मैं जी रहा हूँ तो वो भी जी रही है
जब-जब ये सांस आती है
तब-तब तेरी याद आती है
तेरी याद तड़पाती है
तरसाती है, जलाती है
तेरी याद आती है.....!!

तेरे क़दमों का हर एक निशाँ
मक्का मदीना है मेरा
तेरी याद एक समंदर है
जिसमे खोया सफ़ीना है मेरा
तेरे नाम की पाकीज़ा लहरें
मुझको मुझ तक पहुंचती है
तेरी याद आती है.....!!

तेरी यादों के बिन जीना
यारा जो मुमकिन होता
मैं एक लम्हा भी ना जीता
तेरी यादों में ही मर जाता
तेरी यादें वो पोशीदा* धुन हैं
जिन पर मेरी धड़कन गाती है
तेरी याद आती है.....!!

 
तेरी यादें ही वो रास्ता है
जिस पर दिल ये चलता है
जो इसको थोड़ा छेड़ दूँ मैं
ये बच्चों जैसा मचलता है
जब दिल उलझ सा जाता है
तेरी याद उलझन को सुलझती है
तेरी याद आती है.....!!

तुम्हारा-अनंत

*अज्ञात, गुप्त, अप्रकट, छिपा 
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