सोमवार, जुलाई 03, 2017

इश्क़ का कारोबार..!!

तेरी झूठी झूठी आँखों से
मुझे सच्चा सच्चा प्यार हुआ
मैंने लाख समझाया था दिल को
पर सब समझाना बेकार हुआ
आँखों ने किया आँखों का सौदा
और इश्क़ का कारोबार हुआ
कल से लेकर आज तलक
ऐसा ही हर बार हुआ
इश्क़ का कारोबार हुआ
ऐसा इश्क़ का कारोबार हुआ-2

तेरी थिरकन पे थिरके थे कदम
फिर कहाँ बचे थे हम में हम
रोम रोम सब गिरह खुली
साँस-साँस बरसा सावन
बेफ़िकरी का आलम भी कटा
और मुझमे मैं बेदार हुआ
इश्क़ का कारोबार हुआ
ऐसा इश्क़ का कारोबार हुआ-2

इस दुनिया में ही था मैं
पर इस दुनिया का रहा नहीं
तू मुझसे वो सबकुछ बोला
जो अबतक किसी ने कहा नहीं
जो कुछ अनगढ़ था भीतर-भीतर
वो सबकुछ बन कर तैयार हुआ
इश्क़ का कारोबार हुआ
ऐसा इश्क़ का कारोबार हुआ-2

तेरा झूठा-झूठा सच जो है
सच में सच से भी सच्चा है
इससे अच्छा कुछ भी नहीं
बस ये ही सबसे अच्छा है
तेरे झूठ की गीली मिटटी से
मेरे सच का बदन साकार हुआ
इश्क़ का कारोबार हुआ
ऐसा इश्क़ का कारोबार हुआ-2

तुम्हारा-अनंत


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