रविवार, मार्च 08, 2015

जब खून ज़मीं पर गिरता है..!!

मजलूमों, महकूमों का
मुफलिस और मासूमों का
जब खून ज़मीं पर गिरता है
तब वक्त हकीकत कहता है
तब किला जुल्म का ढहता है
जब खून ज़मीं पर गिरता है-3

ये निजाम है, गद्दारों का
झूठों और मक्कारों का
चोरों का, बटमारों का
डाकू और हत्यारों का
देख कर इनका काला धंधा
लहू मेरा उबलता है
जब खून ज़मीं पर गिरता है

तब वक्त हकीकत कहता है
तब किला जुल्म का ढहता है
जब खून ज़मीं पर गिरता है-3

इन्क़लाब के नारों से
संघर्ष के हथियारों से
मेहनत के औजारों से
अवामी ललकारों से
जुल्मी थर-थर करता है
भीतर भीतर डरता है
जब खून ज़मीं पर गिरता है

तब वक्त हकीकत कहता है
तब किला जुल्म का ढहता है
जब खून ज़मीं पर गिरता है-3

खेतों में, खलिहानों में
फैक्टरी, खदानों में
बागों और बागानों में
जेलों में जिन्दानों में
क्यों मेहनतकश ही पिसता
क्यों सांस-सांस पर लड़ता है
जब खून ज़मीं पर गिरता है

तब वक्त हकीकत कहता है
तब किला जुल्म का ढहता है
जब खून ज़मीं पर गिरता है-3

तुम्हारा-अनंत
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