गुरुवार, सितंबर 17, 2015

चल रही है जिंदगी..!!

चल रही है
चल रही है
चल रही है जिंदगी
ढल रही है
ढल रही है
ढल रही है जिंदगी

रोटी के खेल में
बस में कभी रेल में
भूख की जेल में
कट रही है जिंदगी

चल रही है
चल रही है
चल रही है जिंदगी
ढल रही है
ढल रही है
ढल रही है जिंदगी

धुप में, छाँव में
शहर में, गाँव में
घायल से पाँव में
चुभ रही है जिंदगी

चल रही है
चल रही है
चल रही है जिंदगी
ढल रही है
ढल रही है
ढल रही है जिंदगी

जिस्म में और जान में
इनाम में, ईमान में
आजकल मुसलसल
कुछ चुन रही है जिंदगी

चल रही है
चल रही है
चल रही है जिंदगी
ढल रही है
ढल रही है
ढल रही है जिंदगी
तम्हारा --अनंत
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