सोमवार, अक्तूबर 27, 2014

सजनिया रे...!!

पाँव में बाँध कर नाचूं मैं तो
तेरी यादों की पैजनिया
सजनिया रे...
तूने मुझे पागल करके छोड़ दिया

रह रह बरसा, रह रह तरसा
भटका सागर, सहरा, नदिया
सजनिया रे...
तूने मुझे बादल करके छोड़ दिया

आँखों में उमड़ा दर्द एक गहरा
और सागर सी लहराई अखियाँ
सजनिया रे...
तूने मुझे काजल करके छोड़ दिया

सांस-सांस मेरी बजी मुसलसल
और धड़कन पर तू उभरी पल पल
सजनिया रे...
तूने मुझे पायल करके छोड़ दिया

चाह नहीं कोई बस आह बची है
मेरी निगाह में तेरी निगाह बची है
सजनिया रे...
तूने मुझे घायल करके छोड़ दिया

तुम्हारा-अनंत

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