सोमवार, फ़रवरी 14, 2011

maa

मै चला आया हूँ घर से , 
दो  आँख रोती होगी ,
एक गंगा सी बह रही होगी,
तो एक यमुना हो रही होगी ,
मचलता होगा एक मन , 
ये पूछने के लिए, 
कि आज क्या  खाओगे
सुबह उठने के बाद ,
बढ़ते होंगे दो बेकस कदम ,
मेरे कमरे कि तरफ ,
मुझे जगाने के लिए ,
और मेरा खाली बिस्तर देख कर ,
वापस आ जाते होंगे मायूसी ओढ़कर,
पूजा करते वक़्त जुड़ते होंगे दो हाँथ ,
और एक  मुंह,
 एक मन के साथ  मांगता होगा दुआ, 
मेरे लिए ,
रात को सोते  वक़्त,
एक माँ कलप कर मेरा नाम  ले लेती होगी,
मै चला आया हूँ घर से , 
दो आँख रोती होंगी ,
तुम्हारा--अनंत 
आप यदि घर से बहार है तो आप के घर पर भी दो आँख रोती होगी
 या फिर यदि आप अपने घर से जब कभी बहार जायेंगे ,तो कोई रोये चाहे न रोये दो आँख जरूर रोयेंगी ,
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