सोमवार, अप्रैल 03, 2017

बाबू जी नहीं रहे..!!

-तुम आज तक कोई गिफ्ट नहीं दिए हमें !!
वो चुप था
-कोई ऐसे भी बॉयफ्रेंड बनता है क्या ?
वो फिर भी चुप रहा
- रोमांस कैसे किया जाता है, मालूम ही नहीं तुम्हे
वो फिर चुप रहा
-अब चुप ही रहोगे कि कुछ बोलेगे भी ?
वो फिर चुप रहा
-मेरी सहेलियां सही कहतीं थीं।
क्या कहतीं थीं? उसने पूछा ।
- यही कि तुमसे न हो पायेगा। अब मैं चलती हूँ। तुम बहुत बोर करते हो।
वो वहां से चली गयी और वो वहीँ बैठे-बैठे घर से आयी छोटे भाई की चिट्ठी पढता रहा। जिसमे लिखा था।

बाबू जी नहीं रहे। पिछले बरसात में उनके पैर में फरुहा लग गया था। जिसका इलाज नहीं करा सके और कैंसर बन गया। बाबू जब मरें तो आपका परीक्षा चल रहा था इसलिए हम नहीं बताये आपको। बाबू जी ही कहे थे आपको परेशान ना करें। पढ़ाई ख़राब होगा। हम यहाँ संभाले हुए हैं। चार बीघा और अधिया ले लिए हैं। इस बार कलेक्टर हो जाइएगा न भैया ? पैसा का कौनो दिक्कत हो तो बताइयेगा।
आपका
छोटुवा

वो वहां से उठा और मुनिरका अपने कमरे के लिए निकल गया।
रास्ते भर सोचता रहा पर क्या, पता नहीं !!
तुम्हारा- अनंत
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