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बुधवार, अक्टूबर 22, 2014

एक खता हुई हमसे...!!

एक खता हुई हमसे बस, जो हमने तुमसे प्यार किया
तुमने, जीता हमको हमसे और हम पर अधिकार किया

ऐसा हमको बना दिया कि प्यार और किसी से न हो पाया
न दिल खुल कर हंस पाया और न दिल खुल कर रो पाया
भुला सके होते जो तुमको तो जीवन, जीवन बन जाता
तुम्हारी याद में ये जीवन बस, बेबस भटकन बन पाया
हमने तुमको माँगा और तुमने अपनी यादों का हार दिया  
एक खता हुई हमसे बस... 

जब दर्द तुम्हारा करवट लेता है, तो हम आह से गीत बनाते हैं
तुम बेवफा नहीं, मेरी वफ़ा ही ज्यादा थी, खुद को ये समझाते हैं
कोई वफ़ा किसी से यूं न करे कि खुद से बेवफा हो जाए
कोई याद किसी को यूं न करे कि जीवन आंसू बन जाए
हमने यादो की दुनिया में रो-रो कर जीवन गुज़ार दिया
एक खता हुई हमसे बस... 

हम जब भी पास तुम्हारे आए, बस यूं ही मुस्काते थे
तुमने जख्म दिए थे जो, वो हम तुमसे ही छिपाते थे
तुम कहते थे तो हंस देते थे, तुम कहते तो गाते थे
तुम जो मिल जाते थे तो हम धड़कन पा जाते थे
तुम्हारी यादों के जख्मों का, हमने तुम्हारी यादों से उपचार किया
एक खता हुई हमसे बस...


तुम्हारा-अनंत

शनिवार, सितंबर 20, 2014

झूठे तेल लगाने वाली लड़कियां झूठा प्रेम करतीं हैं

जैसे उनके आयुर्वेदिक तेल में
आयुर्वेदिक जैसा कुछ नहीं था
ठीक वैसे ही
उनके प्रेम में
प्रेम जैसा कुछ नहीं था

तेल के रहते हुए
जैसे टूटते रहे उनके बाल
उनके प्रेम के रहते हुए
वैसे ही टूटते रहे उनके प्रेमी

झूठा तेल लगाने वाली लड़कियां
झूठा प्रेम करतीं है शायद !
इसीलिए उनके प्रेमी
उनके टूटते बालों की तरह
टूटते रहते हैं जीवन भर

पर जैसे बचा रहता है
बहुत सा बाल, उनके सरों में
हज़ार टूटन के बाद भी

वैसे ही बचे रहतें है उनके प्रेमी
हज़ार टूटन के बाद भी
उनके दिलों में

ये लड़कियां
जितना झूठा प्रेम
अपने बालों से करतीं हैं
उतना ही झूठा प्रेम
अपने प्रेमियों से भी  


तुम्हारा-अनंत 

मंगलवार, अप्रैल 05, 2011

मैं गीत प्रणय के गाता हूँ ,

मैं गीत प्रणय के गाता हूँ ,
एक साथी था प्यारा -प्यारा ,
जिस पर तन- मन था वारा,
उस प्रियतम की प्रतिमा, अपने दिल में रोज बनता हूँ ,
मैं गीत प्रणय के गाता हूँ ,
ये मन रोता है उसके बिन ,
दिन बीत रहे है अब गिन-गिन 
मैं अपने व्याकुल मन को धीरे  से धीरज बंधवाता हूँ ,
मैं गीत प्रणय के गाता हूँ ,
एक अजाब अँधेरा दिखता है ,
दिल मेरा उससे डरता है ,
इस अन्धकार से लड़ने को, मैं उसकी यादें सुलगाता हूँ ,
मैं गीत प्रणय के गाता हूँ ,
तुम्हारा --अनंत  

बुधवार, फ़रवरी 23, 2011

न जाने मैं क्यों रोता हूँ ,

न जाने मैं क्यों रोता हूँ ,
मेघ नाचते हैं पूरी रात ह्रदय में ,
जब बचता है थोडा समय सूर्योदय में ,
मन के खेत जोत के साथी, यादें तेरी बोता हूँ 
न जाने मैं क्यों रोता हूँ ,
ये सारा जग रात ओढ़ कर सो जाता है ,
स्वपन नगर में ,स्वप्न देख कर खो जाता है,
पर मैं तो अंगारों की शैया पर ,न जगता हूँ न सोता हूँ 
न जाने मैं क्यों रोता हूँ ,
तुझे मेरी क्या फ़िकर है प्यारे ,
तूने तो तोड़े बंधन सारे ,
अब कुछ कैसे कहूं मैं तुझसे,क्या मैं तेरा होता हूँ ,  
न जाने मैं क्यों रोता हूँ ,
तुम्हारा --अनंत

बुधवार, नवंबर 24, 2010

तुने हमे ठुकराया है

तुने हमे ठुकराया है ,
हम हैं प्रेम पंथ पर चलने वाले ,
विरह अग्नि में जलने वाले,
अश्रु -कणों को नयन दबा कर ,फिर से अधर मुस्काया है ,
तुने हमे ठुकराया है ,
हम सूरज है ढलने वाले ,
हम शिला - खण्ड है गलने वाले,
बिन प्रेम प्राण इस जग जीवन में, कहाँ कोई जी पाया है ,
तुने हमे ठुकराया है ,
ओ! मेरे ह्रदय में पलने वाले ,
ओ! यथार्थ में न मिलने वाले ,
स्वप्नों में तुझको पा कर ,ये मन कैसे बौराया है
तुने हमे ठुकराया है ,
''तुम्हारा --अनंत''

मुझे छुओ मत जल जाओगे

मुझे छुओ मत जल जाओगे ,
तपन है कितनी ,दर्द है कितना ,
जलता है यहाँ तिनका -तिनका,
तुम मेरे पास न आओ प्यारे ,शोक अग्नि में गल जाओगे ,
मुझे छुओ मत जल जाओगे ,
कोई मुझे जला कर चला गया है ,
मुझे बड़े प्रेम से छला गया है ,
सब ढल जाते हैं इस आसमान में ,तुम भी इक दिन ढल जाओगे ,
मुझे छुओ मत जल जाओगे ,
मत कहो कि मैं कहूँ कहानी,
आँखों से फिर झरेगा पानी ,
पत्थर पिघला गाथा सुन कर ,तुम भी व्यर्थ पिघल जाओगे ,
मुझे छुओ मत जल जाओगे ,
''तुम्हारा -अनंत ''

मंगलवार, नवंबर 16, 2010

एहसास

मैं तो बस एक एहसास हूँ,
तितली कि पंखों की रंगत ,
चिड़ियों की कोमल सी हरकत ,
नदी ,पहाड़ी, जंगल ,झाड़ी जमीन और आकाश हूँ ,
मैं तो बस एक एहसास हूँ ,
मंदिर, मस्जिद,मुझे न देखो ,
देख सको तो खुद में देखो ,
क्यों दर-दर भटक रहे हो प्यारे ,मैं कब से तुम्हारे ही पास हूँ ,
मैं तो बस एक एहसास हूं,
लोग मुझे सागर कहते है ,
अल्लहा,ईसू नानक ,नटनागर कहते है ,
पर सच तो ये है मैं ,गरीबों की भूख और प्यास हूँ ,
मैं तो बस रक एहसास हूँ ,
''तुम्हारा --अनंत ''

सोमवार, नवंबर 15, 2010

मत रोको मुझे कह लेने दो

मत रोको मुझे कह लेने दो ,
कुछ उफान सा है भीतर ,
मन मेरा है बिलकुल जर्जर ,
बन गया हूँ अश्रु -नदी मै यारों,मुझको अब तुम बह लेने दो ,
मत रोको मुझे कह लेने दो,
तुम मुझपे दया क्यों करते हो,
मेरे खातिर तुम आँहें क्यों भरते हो ,
ये प्रेम का मीठा दर्द है प्यारे ,मुझको हंस कर सह लेने दो ,
मत रोको मुझे कह लेने दो ,
कल नवीन जब सूर्य उगेगा ,
ये अनंत तब नहीं रहेगा ,
मैं बुझा हुआ दीपक हूं यारों ,मुझको अपने दिल में रह लेने दो ,
मत रोको मुझे कह लेने दो ,
''तुम्हारा --अनंत ''

शनिवार, अक्टूबर 23, 2010

मै कैसे तुम्हे बिसरूंगा


मै कैसे तुम्हे बिसरूंगा 
तुम रक्त धार मे हो मिली हुई 
साँसों के धागे से हो सिली हुई 
मै हर धडकन के साथ प्रिये, 
रह रह कर तुम्हे पुकारूँगा 
मैं कैसे तुम्हे बिसरूंगा 

मेरे स्वप्नों का दर्पण टूट गया 
तेरा हाथ मेरे हाथों से छूट गया 
मैं इस टूटे स्वप्न दर्पण में,
तेरा आनन ही निहारूंगा 
मैं कैसे तुम्हे बिसरूंगा 

तू मुझे बिसारे तेरी इच्छा है ,
क्या पता मुझे क्या गन्दा है क्या अच्छा है ,
पर मैंने तो ठान लिया,
मैं खुद को तुझ पर वारुंगा , 
मैं कैसे तुम्हे बिसरूंगा ,

''तुम्हारा- अनंत''